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कहानियों में स्वरलिपियाँ (निर्मल वर्मा की कहानियों पर बढ़त) उदयन वाजपेयी
भाषा की व्याख्या करने का अर्थ उसे समझना होता है, संगीत की व्याख्या करने का अर्थ संगीत बनाना होता है।थियोडोर एदूर्नो मैं निर्मल वर्मा पर कुछ कहने से पहले महाभारत के लिखे जाने की कहानी और उसकी अपनी व्याख्या सुनाता हूँ।निर्मल...
निर्मल वर्मा की कहानियों में दार्शनिक प्रश्न ख़ालिद जावेद
मेरे पास एक मौन होना चाहिए। मौन, भारतीय संस्कृति में बड़ी बात है। निर्मल की कहानियों पर बात करते हुए मेरे पास मौन होना चाहिए। दूसरी बात यह है कि मेरी हिन्दी अच्छी नहीं है, उर्दू भी मुझे उतनी नहीं आती। मेरे पास एक ही चारा निकलता है कि मैं अपनी भाषा...
सम्वत्सरमूला-अग्नीषोमविद्या मोतीलाल शास्त्री
वाचं देवा उपजीवन्ति विश्वे, वाचं गन्धर्वाः, पशवो मनुष्याः।वाचीमां विश्वा भुवनान्यर्पिता सा नो हवं जुषतामिन्द्रपत्नी।।1।।वागक्षरं प्रथमजा ऋतस्य वेदानां माता, अमृतस्य नाभिः।सा नो जुषाणोपयज्ञमागादवन्ती देवी सुहवा मेऽस्तु।।2।।प...
अव्दैत का विस्तार और संसार ध्रुव शुक्ल
कभी विकल होकर कहने का मन होता है कि अव्दैत की धारणा कुछ विरले ज्ञानियों की ज़िद है और संसार को देखकर लगता है कि वह व्दैत में ही जीने की जिद बांधो हुए है।कोई उत्प्रेरक जरूर है जिसके कारण इतना बड़ा जीवन व्यापार चल रहा है पर विरले ज्ञानियों की नज...
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