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प्रकाश का प्रकाश आस्तीक वाजपेयी
मुझे 24 नवम्बर को रज़ा फाउण्डेशन ने ‘विनय पत्रिका’ पर बोलने के लिए बुलाया था। शाम को एक जगह मैं एक वरिष्ठ कवि, आलोचक, चिन्तक से बात कर रहा था। बीच में कुछ बातचीत ने ऐसा रुख लिया कि उन्होंने मुझे डाँट दिया। उनका कहना था कि मैं ज़्यादा स...
एकान्त का रचनात्मक बसाव मिथलेशशरण चैबे
व्यक्ति की चेतना के बारे में यह एक विचित्र चीज़ है कि जब वह समय के पैमाने में रूपायित होती है तो अनिवार्यतः उपन्यास की विधा में ही ढलकर आती है, किन्तु दूसरे छोर पर जब वह अपने को शब्दों के कालातीत तन्त्र में समेट लेती है तो हमेशा कविता बनकर बाहर नि...
विलक्षण आलोचनात्मक उपक्रम मिथिलेश शरण चैबे
आलोचक या समीक्षक का कार्य वस्तुतः कलाकार या लेखक से भी अधिक तन्मयतापूर्ण और सर्जनशील होता है।- मुक्तिबोध कविता या कथा को पढ़ने से एकदम भिन्न अनुभव है, आलोचना पढ़ना। हालाँकि सभी विधाओं को पढ़ने के अनुभव अलग होते हैं परन्तु आलोचना के मा...
दो समीक्षाएँ मिथलेश शरण चैबे
लिखकर कहते हैंआज कुछ है, कोई चीज ज़रूर है जो तीखे यथार्थ-बोध से अधिक कुछ की माँग करती है ताकि जो कुछ कवि के कवि होने में निहित है वह हो सके, यह मनुष्य से सीधो नंगे-बदन साक्षात्कार की खोज है और यह खोज निर्णय लेने की एक आन्तरिक ज़िम्मेदारी के सा...
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