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सिनेमा कला और संसार कुमार शहानी से उदयन वाजपेयी की बातचीत
ऋत्विक घटक और सत्यजीत राय के बाद कुमार शहानी और मणि कौल सम्भवतः देश के सबसे अध्ािक महत्वपूर्ण फि़ल्मकार रहे हैं। इनकी फि़ल्मों ने न सिर्फ़ हमारे फि़ल्म के देखने में बुनियादी बदलाव लाया है बल्कि इन फि़ल्मों की रौशनी में हम वास्तविकता और स्वयं अपने ...
बच्चों की नज़्में शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी
शेर भी देखा? बिल्ली देखी कुत्ता देखाशेर भी तुमने क्या देखाशेर है जंगल में रहताचूहा उसके घर का राजाभूख लगे तो रोता हैमार हिरन को खाता हैमूँछ है उसकी लम्बी-लम्बीआँख है उसकी नीली-भूरीरात को चमके ...
रतन थियाम की कविताएँ मणिपुरी से अनुवादः सकमचा एवं उदयन वाजपेयी
ज़मीन में दबा व्यतीत पता नहींबीती घटनाओं को तह करकहाँ रखा जाये ?निर्जीव शरीर को ताबूत से ढँक देने के बाद भीउसे कोई न कोई नाम देना ही होता हैध्ाुँए में प्रेत की तरह भटकती हैमेरी बीत चुकी कहानीरेंगती ...
स्टीवन ग्रीको की कविताएँ इतालवी@अँग्रेज़ी से कवि की मदद से अनुवादः उदयन वाजपेयी
स्टीवन ग्रीको का जन्म इतालवी भाषी लुगानो नगर, स्विट्ज़रलैण्ड में 1949। बहुभाषी कवि और अनुवादक, अँग्रेज़ी और इतालवी में लिखते हैं। भारत में ‘समास’ समेत कई पत्रिकाओं में लेख, कविताएँ प्रकाशित। दो कविता संग्रह इटली में प्रकाशित हुए हैं, &...
ग़ज़लें फ़रहत एहसास
1.रक़्स-ए-इल्हाम1 कर रहा हूँमैं जिस्म-कलाम2 कर रहा हूँ1 सूफि़यों का नृत्य 2 बात, शाइ‘री मेरी है जो ख़ास अपनी मिट्टीइस ख़ास को आ’म कर रहा हूँ इक मुश्किल-ए-सख़्त आ पड़ी हैइक सुब्ह को शाम कर रहा...
ख़ुदा के बन्दे सिद्दीक आलम उर्दू से अनुवादः सबा आफ़रीन
दस का गजर बजते ही आत्माएँ बुर्जों, गुम्बदों, कँगूरों से उतर आतीं। वह अप्रयुक्त गिरजाघर के हर अन्ध्ाकारमय और गुप्त गोशे पर कब्ज़ा जमा लेतीं।इंसानों का क्या हाल है? वह आपस में कानाफूसी करतीं। पिशाच अगर बदसूरत होते तो चुड़ेलों के बाल उनके कूल्ह...
नादिर सिक्कों का बक्स सिद्दीक आलम उर्दू से अनुवादः सबा आफ़रीन
मैं एक लम्बे अर्से से उसकी तलाश में था। मैं अपना ज़्यादा वक़्त एक घाट से दूसरे घाट तक पैदल तय करने में बिताया करता। मेरे कुछ दोस्त लांच पर सवार जिसकी चिमनी से धुआँ निकल रहा होता, हमेशा दूसरे किनारे की ओर जा रहे होते। मैं उन्हें दूर से हाथ हिला कर ...
चक्रव्यूह प्रेमलता वर्मा
...इतिहास की भट्ठी में सिंकी, समय की रगड़ से धूसर काले पत्थरों की लपेट से गढ़ी संकरी गली में आबाद यही वह मुहल्ला है...इस गलीनुमा सड़क पर कहर की तरह ढहती नीली,लाल बसें, विशालकाय तिलचिट्टों की शक़्लवाली सरसराती मोटर कारें तथा सड़क के किसी मुहा...
बलौरा गुरप्रीत सहिजी पंजाबी से अनुवादः जसविन्दर कौर बिन्द्रा
युवा पंजाबी उपन्यासकार गुरप्रीत सहिजी के उपन्यास ‘बलौरा’ का केन्द्रीय पात्र बलौरा एक ऐसे युवा चरित्र के रूप में सामने आता है, जिसे खुद पर बेहद भरोसा है। भारत में कृषि एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे मुनाफ़े का रोज़गार नहीं माना जाता। थोड़ी ज़म...
क़यास उदयन वाजपेयी
वीनावह देश लौट गया। वहाँ जाकर, सुना है, किसी पुस्तकालय में काम कर रहा है।अब उसे गये इतना समय बीत गया है कि उसके अभाव का दर्द मेरे भीतर ही कहीं उग आया है इस तरह कि अगर वह दूर हो जाये, मुझे लगेगा कि मेरा कोई अंग टूट कर गिर गया है।ब...
फि़क्शन की सच्चाइयाँ शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी
यह मेरे लिए बड़े इज़्ज़त की बात की है कि मैं शमीम निकहत यादगारी व्याख्यानों के सिलसिले का पहला व्याख्यान पेश करने के लिए आपके सामने हाजि़र हूँ। इज़्ज़त से ज़्यादा, यह मौक़ा मेरे लिए ख़ुशी का होता अगर मरहूमा हमारे दर्मियान होतीं। शमीम निकहत चूँकि क...
भक्तिः सिद्धान्त और साहित्य वागीश शुक्ल
प्रकाशाख्या संवित् क्रमविरहिता शून्यपदतोबहिर्लीनात्यन्तम्प्रसरति समाच्छादनतयाततोऽप्यन्तःसारे गलितरभसादक्रमतयामहाकाली सेयम्मम कलयताम् कालमखिलम्।। -अभिनवगुप्त (क्रमस्तोत्र)(‘प्रकाश’ नाम की संवित् शून्य-स्थान से क्...
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