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ख़ुदा के बन्दे सिद्दीक आलम उर्दू से अनुवादः सबा आफ़रीन
दस का गजर बजते ही आत्माएँ बुर्जों, गुम्बदों, कँगूरों से उतर आतीं। वह अप्रयुक्त गिरजाघर के हर अन्ध्ाकारमय और गुप्त गोशे पर कब्ज़ा जमा लेतीं।इंसानों का क्या हाल है? वह आपस में कानाफूसी करतीं। पिशाच अगर बदसूरत होते तो चुड़ेलों के बाल उनके कूल्ह...
नादिर सिक्कों का बक्स सिद्दीक आलम उर्दू से अनुवादः सबा आफ़रीन
मैं एक लम्बे अर्से से उसकी तलाश में था। मैं अपना ज़्यादा वक़्त एक घाट से दूसरे घाट तक पैदल तय करने में बिताया करता। मेरे कुछ दोस्त लांच पर सवार जिसकी चिमनी से धुआँ निकल रहा होता, हमेशा दूसरे किनारे की ओर जा रहे होते। मैं उन्हें दूर से हाथ हिला कर ...
चक्रव्यूह प्रेमलता वर्मा
...इतिहास की भट्ठी में सिंकी, समय की रगड़ से धूसर काले पत्थरों की लपेट से गढ़ी संकरी गली में आबाद यही वह मुहल्ला है...इस गलीनुमा सड़क पर कहर की तरह ढहती नीली,लाल बसें, विशालकाय तिलचिट्टों की शक़्लवाली सरसराती मोटर कारें तथा सड़क के किसी मुहा...
आख़िरी दावत ख़ालिद जावेद अनुवाद: डाॅ. रिज़वानुल हक़
मैं पहाड़ियों से लाशें उतार लाया हूँ, तुम्हें बता सकता हूँ कि दुनिया रहम से खाली है, और सुनो, अगर खुदा ही रहम से खाली हो,दुनिया में भी रहम नहीं हो सकता।यहूदा अमीखाईसबसे पहले मुझे ये इजाज़त दें कि मैं आपको बता सकूँ कि इस...
ज़िन्दों के लिए एक ताज़ियतनामा’ ख़ालिद जावेद
हम एक साँप बनाना चाहते थे। या वह एक नुक़्ता था जो साँप हो जाना चाहता था मगर रास्ते में उसने अपना इरादा बदल दिया और अपनी दिशा बदल दी।अब वह कुछ और हो गया है। अपने अधूरेपन में लटका, हवा में इधर-उधर डोलता हुआ।क्लेमण्टेपेट में किसी तू...
संशोधन या काटाकूटी जय गोस्वामी अनुवाद: रामशंकर द्विवेदी
वही काण्ड फिर कर डाला ? उफ्, तुम्हारे ऊपर अब कोई वश नहीं रहा। तुम्हें लेकर अब तो चलने से रहा...’ कवि ने चैंककर पलटकर देखा।गृहिणी।‘तुमने यह क्या कर डाला, एक बार देखो तो। पूरा कमरा पानी से लबलबा भरा है। बिस्तर तक भीग गया...&r...
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