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परती परिकथा मदन सोनी
हिन्दी में बहुत कम कृतियाँ - ख़ासतौर से औपन्यासिक कृतियाँ - ऐसी हैं जो उतना लम्बा जीवन जी सकीं हैं जितना परती परिकथा ने जिया है। लगभग साठ बरस बीत जाने के बाद आज भी यह कृति हमारा ध्यान आकर्षित करती है, और इसके दीर्घायु जीवन की सम्भावनाएँ अक्षत बनी ...
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