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फि़क्शन की सच्चाइयाँ शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी
यह मेरे लिए बड़े इज़्ज़त की बात की है कि मैं शमीम निकहत यादगारी व्याख्यानों के सिलसिले का पहला व्याख्यान पेश करने के लिए आपके सामने हाजि़र हूँ। इज़्ज़त से ज़्यादा, यह मौक़ा मेरे लिए ख़ुशी का होता अगर मरहूमा हमारे दर्मियान होतीं। शमीम निकहत चूँकि क...
भक्तिः सिद्धान्त और साहित्य वागीश शुक्ल
प्रकाशाख्या संवित् क्रमविरहिता शून्यपदतोबहिर्लीनात्यन्तम्प्रसरति समाच्छादनतयाततोऽप्यन्तःसारे गलितरभसादक्रमतयामहाकाली सेयम्मम कलयताम् कालमखिलम्।। -अभिनवगुप्त (क्रमस्तोत्र)(‘प्रकाश’ नाम की संवित् शून्य-स्थान से क्...
बूझती अँगुलियाँ जगदीश स्वामीनाथन अँग्रेज़ी से अनुवादः अखिलेश
जलमग्न द्वीप समूहऐ है हायरे माया काहिन हैगय गाआशो के समैया रे माया काहिन है गयरेतहसील माँ तहसीलदार लूटेथाना माँ थानेदारजंगल माँ बंजरिहा लूटेनहीं हय रे ठिकाना माया काहिन है गयरेआशो के समैया रे माया काहिन है...
गणेश और आघुनिक बौद्धिक क्लाॅद अल्वारेस मूल अँग्रेज़ी से अनुवादः मदन सोनी
मेरे लिए यह सम्मान और सौभाग्य की बात है कि मुझे प्रभाष जोशी के सम्मान में आयोजित इस स्मारक व्याख्यान के लिए और ऐसे सम्माननीय श्रोताओं के समक्ष बोलने के लिए आमन्त्रित किया गया। पत्रकार अपने को बौद्धिक वर्ग से जोड़ कर देखते हैं। वे जनता द्वारा पढ़े ...
‘छपाक्’! सोपान जोशी
तीन व्यंजनों को मिला कर बना एक शब्द है ‘छपाक्’। एक बार इसे सस्वर बोलिए, अपने ही कानों में इसे सुनिये। इसकी गूँज में गहरायी से निकलता एक देसी विचार सुनायी देगा। मिट्टी, पानी और सफ़ाई के सम्बन्ध्ा का विचार। छ-पा-क...दनी से। ‘...
सुनो, भाई साध्ाो राजेन्द्र मिश्र
प्रत्येक क्षण दोनों है, प्रवाह और स्थायित्व। अब तक मानव ने क्षण के दो अलग स्वरूपों को एक में मिलाने की भूल की है। इतिहास के सभी दार्शनिकों ने जिन्होंने आने वाले स्वर्ण-युग के बारे में सोचा है, उन्होंने क्षण को प्रवाह या गति के रूप में लिया है और व...
भारतीय उपन्यास की अवधारणा’ वागीश शुक्ल
1जिले अँगरेज़ी में दवअमस कहते हैं उसके लिए (बांग्ला और फिर वहाँ से) हिन्दी में ‘उपन्यास’ शब्द कैसे प्रचलित हो गया इसकी तह में जाने की कोई कोशिश किये बिना मैं ‘उपन्यास’ शब्द के एक प्राचीन शास्त्रीय प्रयोग की ओर ध्यान दि...
कैसे प्रकाशित हुई पथेर पांचाली सागरमय घोष अनुवाद: रामशंकर द्विवेदी
सागरमय घोष (1912-1999) ने उन्नीस सौ सैंतीस में अशोक कुमार सरकार के आग्रह पर देश-पत्रिका का कार्यभार सम्हाला। उन्होंने एक प्रतिज्ञा की थी कि मैं ‘देश’ पत्रिका में स्वयं कुछ नहीं लिखूँगा। फिर भी उनकी दो-तीन पुस्तकें निकली हैं जो अन्य पत्...
चित्रमय भारत सुधाकर यादव हिन्दी अनुवाद - डाॅ. गोरख थोरात
आरम्भभारत में राजनैतिक जागरूकता का दौर आरम्भ होते ही पूरे देश में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध आन्दोलन शुरू हुआ और सभी तबकों में विदेशी वस्तुएँ, विचार, संस्कृति को नकारते हुए स्वदेशी की भावना दृढ़मूल होने लगी। इस प्रक्रिया में औद्योगीकरण का ...
अहिंसा का विचार उदयन वाजपेयी
1.महात्मा गाँधी ने पारम्परिक दृष्टियों से कुछ प्रत्ययों को लेकर, उनमें अपने समय के अनुकूल नये अर्थ शामिल किये और इसके बाद ही वे उन्हें उपयोग में लाये। वैसे यह भी सच है कि शब्द और प्रत्यय इतिहास के परे वास करते हैं, वे इतिहास से अपने घर्षण के...
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