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उपन्यास अंश Next

पीछे ले जाते पेड़ हेमंत शेष

...पहाड़, पेड़, नदी, मकान, मन्दिर, एकान्त और रंग, अलग-अलग चीज़ें होने के बावजूद रहने वालों से इस कदर गहरे जुड़े हैं कि लोग, चीज़़ों के एक दूसरे से जुड़े होने के यथार्थ से ही अनजान हैं। जब-जब ललिताप्रसाद ...

12-Dec-2017 05:55 PM 615
विशेष वागीश शुक्ल

क्या दे सदा कि0 उल्फ़त-ए-गुमगश्तगाँ से आह
है सुर्म0 गर्द-ए-रह ब0-गुलू-ए-जरस तमाम
गुज़रा जो आशियाँ का तसव्वुर ब0-वक़्त-ए-बन्द
मिज़गान-ए-चश्म-ए-दाम हुए ख़ार-ओ-ख़स तमाम
-मिजऱ्ा ग ...

06-Apr-2017 08:51 PM 1582
क़ब्ज़े ज़माँ 1 शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी उर्दू से अनुवाद रिज़वानुल हक़

मैं बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, इस वजह से नहीं कि मेरे दिमाग़ में उलझन थी या दिल में कसक थी। कभी कभी शाम ढलते ही और बिस्तर पर जाने के पहले एहसास हो जाता है कि आज की रात नींद न आएगी। मुझे कैफ़ी आज़ ...

06-Apr-2017 08:45 PM 3915
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