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आधुनिक भारत की आधारशिलाएँ आशीष नन्दी से उदयन वाजपेयी की बातचीत
वर्ष 1937 को भागलपुर में जन्मे आशीष नन्दी देश के श्रेष्ठ विचारकों में एक हैं। वे राजनैतिक मनोविश्लेषक, समाजशास्त्री और आधुनिकता के समर्थ आलोचक हैं। आशीष नन्दी ने कलकत्ते में चिकित्सा शिक्षा को बीच में ही छोड़कर नागपुर के हिसलाॅप महाविद्यालय से समाज...
खुदा की आत्मकथा कुमार शहानी सिन्धी से अनुवाद: रश्मि रामानी
मैं कहाँ हूँ ? कहाँ जाऊँ ? तुम नहीं हो सिर्फ़ मेरे दिल में तुम नहीं हो न बाहर न अन्दर तुम हो आकाश से परे बताओ कहाँ हो ? माँ ...
असल-अनन्त अमित दत्ता
अज्ञात शिल्पी फ़िल्म बनाना मेरे लिए एक शिल्पी के पदचिन्हों पर चलने जैसा था। मुझे कई प्राचीन ग्रन्थों का अध्ययन करना था और अनुवाद भी। इस प्रक्रिया के दौरान मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि मेरे नोट्स व अनुवाद जो मैंने कई श्लोकों व उक्तियों के किये थे, मेरे अन...
मैं जहाँ भी रहूँ मोनालिसा जेना की कविताएँ ओड़िया से अनुवाद: दुष्यन्त
मुद्राएक बंगाली कवि वृक्ष की जड़ से कविता का गठबन्धन कर रहे थे शब्दों के किसलय...कविता का अरण्यभावों का मलयस्पर्श, कविता की छायासब बिखर जाएगा बंजर ज़मीन पर एक डलिया हृदय के फूल कविता के हाथ फैलाय...
हिरेन भट्टाचार्य की कविताएँ असमिया से अनुवाद: किशोर कुमार जैन, अपराजिता डेका
छायापेड़ से छाया जैसे तैसे उड़ गयीमानो कहीं चली जाएगी...पेड़ से छायाजैसे तैसेउड़ गयीमानो दूसरी छाया में मुँह डालकर कहेगीःमेरी छाती रेगिस्तान है हाथ रखकर देखो तुम को जला देगी।पेड़ से छाया...
कविताएँ पूनम अरोड़ा
1.तुम कहते हो, मैंने तुम्हें माँसभक्षी बनायामुझे लगा मैंने केवल खुद को तुम्हे सौंप दिया थातुम जिह्ना के भोगे हुए आनन्द थेमैं सन्तुलन के तर्पण का पानीहम अपने-अपने बीज थे ! न पुत्र हूँ मैं न पुत्रीपेड़ हूँ ...
आख़िरी दावत ख़ालिद जावेद अनुवाद: डाॅ. रिज़वानुल हक़
मैं पहाड़ियों से लाशें उतार लाया हूँ, तुम्हें बता सकता हूँ कि दुनिया रहम से खाली है, और सुनो, अगर खुदा ही रहम से खाली हो,दुनिया में भी रहम नहीं हो सकता।यहूदा अमीखाईसबसे पहले मुझे ये इजाज़त दें कि मैं आपको बता सकूँ कि इस...
ज़िन्दों के लिए एक ताज़ियतनामा’ ख़ालिद जावेद
हम एक साँप बनाना चाहते थे। या वह एक नुक़्ता था जो साँप हो जाना चाहता था मगर रास्ते में उसने अपना इरादा बदल दिया और अपनी दिशा बदल दी।अब वह कुछ और हो गया है। अपने अधूरेपन में लटका, हवा में इधर-उधर डोलता हुआ।क्लेमण्टेपेट में किसी तू...
संशोधन या काटाकूटी जय गोस्वामी अनुवाद: रामशंकर द्विवेदी
वही काण्ड फिर कर डाला ? उफ्, तुम्हारे ऊपर अब कोई वश नहीं रहा। तुम्हें लेकर अब तो चलने से रहा...’ कवि ने चैंककर पलटकर देखा।गृहिणी।‘तुमने यह क्या कर डाला, एक बार देखो तो। पूरा कमरा पानी से लबलबा भरा है। बिस्तर तक भीग गया...&r...
भारतीय उपन्यास की अवधारणा’ वागीश शुक्ल
1जिले अँगरेज़ी में दवअमस कहते हैं उसके लिए (बांग्ला और फिर वहाँ से) हिन्दी में ‘उपन्यास’ शब्द कैसे प्रचलित हो गया इसकी तह में जाने की कोई कोशिश किये बिना मैं ‘उपन्यास’ शब्द के एक प्राचीन शास्त्रीय प्रयोग की ओर ध्यान दि...
कैसे प्रकाशित हुई पथेर पांचाली सागरमय घोष अनुवाद: रामशंकर द्विवेदी
सागरमय घोष (1912-1999) ने उन्नीस सौ सैंतीस में अशोक कुमार सरकार के आग्रह पर देश-पत्रिका का कार्यभार सम्हाला। उन्होंने एक प्रतिज्ञा की थी कि मैं ‘देश’ पत्रिका में स्वयं कुछ नहीं लिखूँगा। फिर भी उनकी दो-तीन पुस्तकें निकली हैं जो अन्य पत्...
चित्रमय भारत सुधाकर यादव हिन्दी अनुवाद - डाॅ. गोरख थोरात
आरम्भभारत में राजनैतिक जागरूकता का दौर आरम्भ होते ही पूरे देश में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध आन्दोलन शुरू हुआ और सभी तबकों में विदेशी वस्तुएँ, विचार, संस्कृति को नकारते हुए स्वदेशी की भावना दृढ़मूल होने लगी। इस प्रक्रिया में औद्योगीकरण का ...
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