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खुदा की आत्मकथा कुमार शहानी सिन्धी से अनुवाद: रश्मि रामानी
मैं कहाँ हूँ ? कहाँ जाऊँ ? तुम नहीं हो सिर्फ़ मेरे दिल में तुम नहीं हो न बाहर न अन्दर तुम हो आकाश से परे बताओ कहाँ हो ? माँ ...
असल-अनन्त अमित दत्ता
अज्ञात शिल्पी फ़िल्म बनाना मेरे लिए एक शिल्पी के पदचिन्हों पर चलने जैसा था। मुझे कई प्राचीन ग्रन्थों का अध्ययन करना था और अनुवाद भी। इस प्रक्रिया के दौरान मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि मेरे नोट्स व अनुवाद जो मैंने कई श्लोकों व उक्तियों के किये थे, मेरे अन...
मैं जहाँ भी रहूँ मोनालिसा जेना की कविताएँ ओड़िया से अनुवाद: दुष्यन्त
मुद्राएक बंगाली कवि वृक्ष की जड़ से कविता का गठबन्धन कर रहे थे शब्दों के किसलय...कविता का अरण्यभावों का मलयस्पर्श, कविता की छायासब बिखर जाएगा बंजर ज़मीन पर एक डलिया हृदय के फूल कविता के हाथ फैलाय...
हिरेन भट्टाचार्य की कविताएँ असमिया से अनुवाद: किशोर कुमार जैन, अपराजिता डेका
छायापेड़ से छाया जैसे तैसे उड़ गयीमानो कहीं चली जाएगी...पेड़ से छायाजैसे तैसेउड़ गयीमानो दूसरी छाया में मुँह डालकर कहेगीःमेरी छाती रेगिस्तान है हाथ रखकर देखो तुम को जला देगी।पेड़ से छाया...
कविताएँ पूनम अरोड़ा
1.तुम कहते हो, मैंने तुम्हें माँसभक्षी बनायामुझे लगा मैंने केवल खुद को तुम्हे सौंप दिया थातुम जिह्ना के भोगे हुए आनन्द थेमैं सन्तुलन के तर्पण का पानीहम अपने-अपने बीज थे ! न पुत्र हूँ मैं न पुत्रीपेड़ हूँ ...
गाथा सप्तशती कुछ कविताएँ अनुवाद - उदयन वाजपेयी
गाथा सप्तशती की कविताओं के ये मुक्त अनुवाद हैं। कोई चाहे तो इन्हें पुनर्रचना भी कह सकता है। पर ये हैं अनुवाद ही जहाँ ‘अनु’ उपसर्ग लगभग उसी अर्थ में आया है जैसा वह ‘अनुनाद’ में आता है। मेरी इच्छा इस कालजयी काव्य संकलन की क़री...
अब न बुलाओ प्रवासिनी महाकुद ओड़िया से अनुवाद : दीप्ति प्रकाश
मुझे बार-बार बुला कर मेरे चारों ओर इस तरह महफ़िल न सजाओआवेग की सफ़ेद राजहंसिनी को मेरी ओर मत भेजो। राजहंसिनी का एकाकी स्वर मुझे इतना कमज़ोर बना देता है कि उड़ जाती है दिशान्त तक मेरी मृण्मय सत्ता। प्...
कविताएँ 2017 शिरीष ढोबले
अश्व-1 जब वे पहचान लेते हैंयुद्ध का क्षेत्र और पराजय की गन्धजब उनकी आँख पर पड़ती है भुजा के घाव से बहते रक्त की धारावे इसकी अनदेखी कर देते हैं अश्वारोही प्राण तज देता है अपने पर प्राणों काहोता ह...
बफऱ् के दिन दिलीप चित्रे मराठी से अनुवाद . गणेश गायकवाड़
1975 साल के सितम्बर महीने से 1977 साल के दिसम्बर महीने तक, आयोवा सिटी, अमरीका में इण्टरनेशनल रायटिंग प्रोग्राम के सौजन्य से मेरा रहना हुआ। 1975, 1976, और 1977 की बर्फ़ को  इस आवास में अनुभव किया। 1980 साल में सोवियत यूनियन और हंगारी में जाड़ा...
मेघ जैसा मनुष्य शंख घोष की कुछ कविताएँ बांग्ला से अनुवादः प्रयाग शुक्ल
जामभालू के पेट में भालू के तलुवेस्थिर है काल जो असीम।लटकाये गला है जि़राफ़उछल-उछल पड़ती ज़ेब्रा क्रासिंगहंस वे कई हज़ारचाहते झपटना पंख दूसरों केबालक भिखारी भरी दोपहरडुगडुगी बजाता और गाता हुआ गाना।...
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