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कविताएँ Next

खुदा की आत्मकथा कुमार शहानी सिन्धी से अनुवाद: रश्मि रामानी

मैं
कहाँ हूँ ?
कहाँ जाऊँ ?
तुम नहीं हो
सिर्फ़
मेरे दिल में
तुम नहीं हो

बाहर न अन्दर
तुम हो
आकाश से परे
बताओ
कहाँ हो ?
माँ

...
05-Sep-2018 07:22 PM 48
असल-अनन्त अमित दत्ता

अज्ञात शिल्पी फ़िल्म बनाना मेरे लिए एक शिल्पी के पदचिन्हों पर चलने जैसा था। मुझे कई प्राचीन ग्रन्थों का अध्ययन करना था और अनुवाद भी। इस प्रक्रिया के दौरान मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि मेरे नोट्स व अनुवाद ...

05-Sep-2018 06:21 PM 113
मैं जहाँ भी रहूँ मोनालिसा जेना की कविताएँ ओड़िया से अनुवाद: दुष्यन्त

मुद्रा
एक बंगाली कवि वृक्ष की जड़ से
कविता का गठबन्धन कर रहे थे
शब्दों के किसलय...
कविता का अरण्य
भावों का मलयस्पर्श, कविता की छाया
सब बिखर जाएगा
बंजर ज़मीन पर...

05-Sep-2018 05:21 PM 109

हिरेन भट्टाचार्य की कविताएँ असमिया से अनुवाद: किशोर कुमार जैन, अपराजिता डेका

छाया
पेड़ से छाया
जैसे तैसे उड़ गयी
मानो कहीं चली जाएगी...
पेड़ से छाया
जैसे तैसे
उड़ गयी
मानो दूसरी छाया में मुँह डालकर कहेगीः
मेरी छाती रेगिस्तान है
हाथ ...

05-Sep-2018 04:20 PM 110
कविताएँ पूनम अरोड़ा

1.
तुम कहते हो, मैंने तुम्हें माँसभक्षी बनाया
मुझे लगा मैंने केवल खुद को तुम्हे सौंप दिया था
तुम जिह्ना के भोगे हुए आनन्द थे
मैं सन्तुलन के तर्पण का पानी
हम अपने-अपने बीज थ ...

05-Sep-2018 03:20 PM 131
गाथा सप्तशती कुछ कविताएँ अनुवाद - उदयन वाजपेयी

गाथा सप्तशती की कविताओं के ये मुक्त अनुवाद हैं। कोई चाहे तो इन्हें पुनर्रचना भी कह सकता है। पर ये हैं अनुवाद ही जहाँ ‘अनु’ उपसर्ग लगभग उसी अर्थ में आया है जैसा वह ‘अनुनाद’ म ...

12-Dec-2017 05:54 PM 585

अब न बुलाओ प्रवासिनी महाकुद ओड़िया से अनुवाद : दीप्ति प्रकाश

मुझे बार-बार बुला कर
मेरे चारों ओर इस तरह
महफ़िल न सजाओ
आवेग की सफ़ेद राजहंसिनी को
मेरी ओर मत भेजो।

राजहंसिनी का एकाकी स्वर
मुझे इतना कमज़ोर बना देता है कि
...

12-Dec-2017 05:54 PM 413
कविताएँ 2017 शिरीष ढोबले

अश्व-1

जब वे पहचान लेते हैं
युद्ध का क्षेत्र और पराजय की गन्ध
जब उनकी आँख पर पड़ती है
भुजा के घाव से बहते रक्त की धारा
वे इसकी अनदेखी कर देते हैं

अश्वारोही प्राण ...

12-Dec-2017 05:54 PM 427
बफऱ् के दिन दिलीप चित्रे मराठी से अनुवाद . गणेश गायकवाड़

1975 साल के सितम्बर महीने से 1977 साल के दिसम्बर महीने तक, आयोवा सिटी, अमरीका में इण्टरनेशनल रायटिंग प्रोग्राम के सौजन्य से मेरा रहना हुआ। 1975, 1976, और 1977 की बर्फ़ को  इस आवास में अनुभव कि ...

09-Apr-2017 02:44 AM 1079

मेघ जैसा मनुष्य शंख घोष की कुछ कविताएँ बांग्ला से अनुवादः प्रयाग शुक्ल

जाम
भालू के पेट में भालू के तलुवे
स्थिर है काल जो असीम।
लटकाये गला है जि़राफ़
उछल-उछल पड़ती ज़ेब्रा क्रासिंग
हंस वे कई हज़ार
चाहते झपटना पंख दूसरों के
बालक भिखारी ...

06-Apr-2017 09:01 PM 1049
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