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आख़िरी दावत ख़ालिद जावेद अनुवाद: डाॅ. रिज़वानुल हक़
मैं पहाड़ियों से लाशें उतार लाया हूँ, तुम्हें बता सकता हूँ कि दुनिया रहम से खाली है, और सुनो, अगर खुदा ही रहम से खाली हो,दुनिया में भी रहम नहीं हो सकता।यहूदा अमीखाईसबसे पहले मुझे ये इजाज़त दें कि मैं आपको बता सकूँ कि इस...
ज़िन्दों के लिए एक ताज़ियतनामा’ ख़ालिद जावेद
हम एक साँप बनाना चाहते थे। या वह एक नुक़्ता था जो साँप हो जाना चाहता था मगर रास्ते में उसने अपना इरादा बदल दिया और अपनी दिशा बदल दी।अब वह कुछ और हो गया है। अपने अधूरेपन में लटका, हवा में इधर-उधर डोलता हुआ।क्लेमण्टेपेट में किसी तू...
संशोधन या काटाकूटी जय गोस्वामी अनुवाद: रामशंकर द्विवेदी
वही काण्ड फिर कर डाला ? उफ्, तुम्हारे ऊपर अब कोई वश नहीं रहा। तुम्हें लेकर अब तो चलने से रहा...’ कवि ने चैंककर पलटकर देखा।गृहिणी।‘तुमने यह क्या कर डाला, एक बार देखो तो। पूरा कमरा पानी से लबलबा भरा है। बिस्तर तक भीग गया...&r...
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