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कृष्ण बलदेव वैद

19-8-2002
परसों थके टूटे यहाँ पहुँचे। अरोचक सफ़र के बाद। रास्ते में कोई हादसा हुआ न हैरानी। सफ़र के साथी सब सूखे, सहायक सब रूखे। कहीं कोई शरारा नहीं था। पुराने, तीस-पैंतीस-चालीस साल पहले के हवाई ...

12-Dec-2017 05:56 PM 391
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